एनपीए ( NPA ) अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक क्यों है?

एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) ( NPA ) – ऋण जो बैंकों को वापस नहीं मिलते हैं। 

ऋण राशि वापस न मिलने के कारण बैंकों के पास तरलता ( पैसो ) की कमी हो जाती है। दूसरा, एनपीए अधिक होने के कारण बैंकों को उधारी पर अधिक ब्याज देना पड़ता है, जिससे वे अपने ग्राहकों को उच्च ब्याज दरों पर उधार देते है। 

एनपीए बैंकों की लाभप्रदता कम कर देता है, कई बैंक उच्च एनपीए के कारण घाटे में चले जाते हैं। एनपीए का बैंकों के कारोबार पर गहरा असर पड़ा है।

बैंक किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी होते हैं, जो देश के आर्थिक विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

बहुत अधिक एनपीए के कारण बैंकों में तरलता ( पैसो ) की कमी हो जाती है। जिसके कारण व्यवसायों को ऋण नहीं मिल पाता, देश मे नए निर्माण कारखाने नहीं बनते, उत्पादन नहीं बढ़ता और नई नौकरियां भी पैदा नही होती जो देश के आर्थिक विकास की गति को धीमा कर देता है।

दूसरा, ऋण भी उच्च ब्याज दर पर मिलता है, जिसके कारण आम व्यक्ति ऋण लेने में सक्षम नहीं होते, नए व्यवसाय शुरू नहीं होते, लोग अपने व्यवसाय का विस्तार नही कर पाते और लोगों को आय में वृद्धि नहीं होती है।

निष्कर्ष

बहुत ज्यादा एनपीए किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अभिशाप है। जो देश की आर्थिक वृद्धि में बाधक है।

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