Bad Bank ( बैड बैंक ) क्या है? । What is Bad Bank in Hindi?

बैड बैंक क्या होता है?

Bad Bank: बैड बैंक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी होती है, जो कुछ डिस्काउंट पर वाणिज्यिक बैंकों से खराब ऋण (एनपीए) खरीदती है और एक कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से डिफॉल्टरों से पैसा वसूलने की कोशिश करती है।

एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ( Asset Reconstruction Company ) के काम – एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियां बैड लोन (एनपीए) बैंकों से खरीदती हैं।

उदाहरण के लिए – मान लीजिए राम ने एक बैंक से 100 रुपए का लोन लिया लेकिन अब राम के पास 100 रुपये नही है की वो बैंक से लिया हुए पैसे को लौटा सकें, जब बैंक को अपना पैसा नही मिला तो बैंक ने इसे नॉन-परफार्मिंग एसेट घोषित कर दिया और राम एक डिफॉल्टर बन गया। फिर इसी NPA को एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने खरीद लिया, बैंक को कंपनी ने 15 रुपये तुरंत दे दिए और बाकी के राम से रुपये वसूलने के बाद, इसमे कंपनी ने कुछ कमीशन भी लिया।

बैड बैंक के काम

1- वाणिज्यिक बैंकों से छूट पर खराब ऋण (एनपीए) खरीदना।

2- एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से डिफॉल्टरों से ऋण वसूलने की कोशिश करना।

बैड बैंक की आवश्यकता ( Idea behind a Bad Bank )

  • Non Performing Asset ( NPA ) – बैंकों द्वारा दिया गया ऋण, जो उन्हें वापस नहीं मिला।
  • बैंकिंग सेक्टर का कुल एनपीए 9 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का अधिकतम NPA 7.2 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल एनपीए का 80% है। निजी क्षेत्र के बैंकों का एनपीए 1.8 लाख करोड़ है।
  • एनपीए की बढ़ती समस्या को देखते हुए, भारतीय बैंकिंग संघ (IBA) ने RBI के सामने एक बैड बैंक बनाने की पेशकश की थी।

बैंक पर एनपीए का प्रभाव

  • 1- एनपीए के कारण, बैंक को उधार लेने के लिए अधिक ब्याज देना पड़ता है, इसलिए बैंक अपने ग्राहक को दिए गए ऋण पर अधिक ब्याज वसूलता है, तो बहुत कम ग्राहक उस बैंक से ऋण लेते हैं। सरल शब्दों में एनपीए बैंकों के संपूर्ण व्यवसाय को प्रभावित करता हैं।
  • 2- बैंकों का वैल्यूएशन ( Valuation ) कम हो जाती है।

बैंक बैड बैंक क्यों बनाना चाहते हैं?

मान लो कि किसी बैंक का 100 रुपये का एनपीए है, बैंक ने उन एनपीए को बैड बैंक को दे दिया। बदले में, बैंक को तुरंत RBI के नियमों के अनुसार 15% रुपये मिलेंगे, बाकी रसीद के फॉर्म में और बैड बैंक को अपना कमीशन। ये बैंक के लिए लाभदायक हैं क्योंकि उन्हें तुरंत 15% रुपये मिल जाते है, और बैंक उन पैसों आगे लोन के रूप दे सकता है।

बैड बैंक के पास पैसा कहां से आएगा।

यदि एक बैड बैंक बनता है, तो सरकार को बैड बैंक में 1 से 2 बिलियन डॉलर का निवेश करना होगा।

बैड बैंक के फायदे और नुकसान ( Advantages and Disadvantages of Bad Banks in Hindi )

बैड बैंक के फायदे

1- बैंकों की बैलेंस शीट साफ हो जाएगी।

2- एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी के पास विशेषज्ञ होने से ऋण वसूली में आसानी होगा।

बैड बैंक के नुकसान

  • 1- इससे बस एक लेखांकन परिवर्तन ( Accounting Change ) होगा, एनपीए समस्या बरकरार रहेगी।
  • 2- भारत में ऋण वसूली बहुत कठिन है।
  • 3- बैड बैंक की अवधारणा पूरी दुनिया में विफल रही है।
  • 4- जब बैंक के सभी एनपीए को एक बैड बैंक दिया जाएगा, तो इससे बैंक पर दबाव समाप्त हो जाएगा, जिससे बैंकों के भविष्य में अधिक एनपीए हो सकता है।

क्या बैड बैंक बनाने से NPA की समस्या खत्म हो जाएंगी?

नहीं:- केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट साफ हो होगी। ये कुछ इस तरह है कि अपना बोझ दूसरे पर लादना।

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