सूर्यपुत्र कर्ण के गुरु का क्या नाम था?

कर्ण के गुरु भगवान परशुराम थे। 

नाम  परशुराम ( Parshuram ) 

कर्ण परशुराम के शिष्य कैसे बनें?

हम सभी जानते है की कर्ण की माता कुंती थी, क्योंकि कर्ण का जन्म उनकी विवाह के पूर्व हुआ था। इसी कारण उन्होंने लज्जा वश कर्ण को गंगा नदी में बहा दिया। कर्ण बहते हुए भीष्म के सारथी अधिरथ को मिले। अधिरथ और उनकी पत्नी राधा ने कर्ण को अपने पुत्र के भाँति पाला। बचपन से ही कर्ण एक तेजस्वी बालक था क्योंकि उसका जन्म कवच और कुंडल के साथ हुआ था। कर्ण की रुचि धनुष विद्या में थी, लेकिन उस समय जाती विभाजन था सूत पुत्र होने कारण कर्ण को धनुष विद्या सीखने का अधिकार नही था। कर्ण धनुष विद्या सीखने के लिए गुरुद्रोणन के पास गए लेकिन उन्होंने धनुष विद्या देने से मना कर दिया कहा कि वो केवल राजकुमारों को ही शिक्षा देते है, इससे कर्ण को बहुत निराशा हुई फिर उन्होंने भगवान परशुराम के बारे में सुना लेकिन वे केवल ब्राह्मणों को ही शिक्षा देते है, फिर कर्ण ब्राह्मण का रूप धारण कर भगवान परशुराम के पास गए उनसे विद्या के लिए आग्रह किया, फिर भगवान परशुराम ने उन्हें शिक्षा दी, लेकिन एक दिन भगवान परशुराम कर्ण के पैरों पर सर रखकर विश्राम कर रहे थे, तभी एक कीड़े ने कर्ण को बहुत गहरा घाव दे दिया, लेकिन कर्ण वहाँ से हिला तक नहीं जब खून की वजह से भगवान परशुराम की नींद खुली तो उन्होंने कहा तुम कौन हो सच बताओ क्योंकि एक ब्राह्मण इतना दर्द बर्दाश नही कर सकता, कर्ण ने कहा कि वो एक सूत पुत्र है, इससे भगवान परशुराम ने क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि जब भी तुम्हे अपनी विद्या की सबसे अधिक आवश्यकता होगी तो तुम्हारी विद्या तुम्हारे किसी काम नही आएगी वो विलुप्त हो गायेगी।

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