रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय। | Rabindranath Tagore Biography in Hindi

रबीन्द्रनाथ टैगोर कौन थे?

आज रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को किसी भी परिचय की जरूरत नही है, एक ऐसे शख्स जो कवि, संगीतकार, चित्रकार, लेखक और नाटककार थे। जिनको सन 1913 में साहित्य में गीतांजलि के लिए नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया और 3 जून 1915 को नाइटहुड की उपाधि मिली। 

वे एशिया के पहले इंसान थे जिनको नोबेल प्राइज मिला। रबिन्द्रनाथ टैगोर जी दुनिया के एक एकमात्र लेखक थे, जिनकी दो रचनाओं को भारत और बांग्लादेश ने अपने राष्ट्रगान के रूप में चुना। इसलिए आज हम रबीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी, उनके संघर्ष, उनका महत्वपूर्ण कार्य और उनके विचारों के बारे में जानेंगे।

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय 

जन्म – 7 मई 1861 ( कोलकाता, वेस्ट बंगाल में )
मृत्यु – 7 अगस्त 1941 ( कोलकाता, वेस्ट बंगाल में )
पिता – देबेंद्रनाथ टैगोर
माता – शारदा देवी
जीवनसंगिनी – मृणालिनी देवी
संताने – 5 ( जिनमे से दो का बाल्यकाल में ही निधन हो गया )
व्यवसाय – कवि, लेखक, संगीतकार, नाटककार और चित्रकार
पुरस्कार – 1913 में साहित्य के लिए नोबेल प्राइज और
3 जून 1915 में नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय कार्य – गीतांजलि, जन गण मन ( भारत का राष्ट्रगान ), 
आमार सोनार बंगला ( बांग्लादेश का राष्ट्रगान ) और अन्य महत्वपूर्ण कार्य।
नागरिकता – भारतीय
Rabindranath Tagore Biography in Hindi

Rabindranath Tagore Biography in Hindi – रबीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी। 

Rabindranath Tagore Biography in Hindi
Rabindranath Tagore Biography in Hindi

रबीन्द्रनाथ टैगोर का प्रारंभिक जीवन

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के एक धनी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम देबेंद्रनाथ टैगोर था और उनकी माता शारदा देवी थीं। रवींद्रनाथ टैगोर के 13 भाई-बहन थे, रबीन्द्रनाथ टैगोर 13 भाई-बहनों में चौथे जीवित पुत्र थे।  

रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देबेंद्रनाथ टैगोर ब्रह्मो समाज से बहुत ही ज्यादा प्रभावित थे, इसीलिए उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग को चुना। वो अक्सर सफर करते रहते थे। रबीन्द्रनाथ टैगोर बहुत छोटे थे, जब उनकी माता शारदा देवी का निधन हो गया। इसीलिए उनका पालन-पोषण नौकरों द्वारा किया गया। रबींद्रनाथ टैगोर की प्रारंभिक शिक्षा प्रतिष्ठित सेंट जेवियर स्कूल (  St. Xavier’s School )  से हुई। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म बुद्धिजीवियों के घर में हुआ था, रबीन्द्रनाथ टैगोर के सबसे बड़े भाई द्विजेन्द्रनाथ टैगोर एक कवि और दार्शनिक थे। और उनके दूसरे बड़े भाई सत्येन्द्रनाथ टैगोर पहले भारतीय और गैर-यूरोपीय व्यक्ति बने जिनको भारतीय सिविल सेवा में चुना गया।

एक और बड़े भाई ज्योतिंद्रनाथ टैगोर जो कि एक संगीतकार और नाटककार थे। उनकी एक बहन भी थी जिसका नाम स्वर्णकुमारी था जो एक उपन्यास लेखक थीं। उनके घर सब बुद्धिजीवी थे, इसलिए रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने ज्यादातर शिक्षा अपने घर पर ही प्राप्त की है, अपने बड़े भाइयों से या घर पर नियुक्ति शिक्षकों से। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई जिनकी शादी 9 साल की कादंबरी देवी से हुई थीं। रबीन्द्रनाथ टैगोर और कादंबरी देवी की उम्र लगभग बराबर थी इसीलिए ज्यादातर समय उन दोनों ने साथ बिताया कहा जाता है कि कादंबरी देवी रबीन्द्रनाथ टैगोर जी से प्रेम करती थी। इसलिए सन 1883 रबीन्द्रनाथ टैगोर के विवाह के पश्चात कादंबरी देवी ने आत्महत्या कर ली।

शिक्षा

रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को आधुनिक शिक्षा प्रणाली बिल्कुल पसंद नही इसीलिए वो स्कूल से दूर भागते रहे। उनका मानना था कि प्राचीन शिक्षा प्रणाली आज की प्रणाली से काफी बेहतर है। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने घर पर बहुत कुछ सीखा था, जैसे कुश्ती, कला, भूगोल, इतिहास, साहित्य, गणित, संस्कृति और अंग्रेजी। जिसमें उनकी मदद उनके एक और भाई हरेन्द्रनाथ टैगोर ने की थी।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने भी अपने बच्चो को अंग्रेजी और संगीत सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। इसीलिए उनके पिता ने कुछ संगीतकारो को भी घर पर नियुक्त किया था।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता का सपना था की उनका बेटा बड़ा होकर एक वकील बने। इसीलिए सन 1878, रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने ब्राइटन, ईस्ट ससेक्स, इंग्लैंड में एक सार्वजनिक कॉलेज में एडमिशन लिया। पढ़ाई में रुचि न होने के कारण, 1880 में, वह अपनी पढ़ाई पूरी किए बिना ही भारत लौट आए।

भारत आकर उन्होंने 1882 में दो पद्य नाटक प्रकाशित किए, एक का नाम “रुद्र चक्र” था और दूसरा एक “संध्या संगीत” कविताओं का संग्रह था।

विवाह

इसी बीच सन 1883 को रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 10 वर्ष की कन्या मृणालिनी देवी से विवाह कर लिया। इसके कुछ समय बाद 20 मई 1884 को कादंबरी देवी ने आत्महत्या कर ली।

दुखद साल

  • सन 1902 में उनकी पत्नी मृणालिनी देवी और कुछ समय बाद उनके दो बेटों का भी निधन हो गया।
  • सन 1905 में उनके पिता देबेंद्रनाथ टैगोर का भी निधन हो गया।

पुरस्कार

  • नवंबर 1913 में रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार, साहित्य में गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 20 दिसंबर 1915 को, कलकत्ता विश्वविद्यालय ने रबीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य के लिए डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया।
  • 3 जून 1915 को, रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को ब्रिटेन ने नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया। हालांकि जालियनवाला हत्याकांड के बाद उन्होंने ये उपाधि को वापस कर दिया।

शांतिनिकेतन की स्थापना

23 दिसंबर 1921 को, उन्होंने विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की। वो चाहते थे कि भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित किया जाए। जहाँ पर पेड़ो ने नीचे पढ़ाया जाए, बच्चों को आध्यात्मिक शिक्षा दी जाए और बच्चे कुछ सालों तक ब्रह्मचर्य का पालन करें।

विश्व भारती विश्वविद्यालय को चलाने के लिए रबींद्रनाथ टैगोर जी ने अपने किताबो के कॉपीराइट, यहां तककि अपनी पत्नी के गहने तक बेच दिए। उन्होंने जीवन भर इस विश्वविद्यालय के लिए काम किया उन्होंने इसके लिए फंडिंग इक्कठा की, नाटक भी प्ले किये।

देशभक्ति और दया भाव

  • जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने नाइटहुड की उपाधि को त्याग दिया। उन्होंने मासूम लोगों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियो का भी विरोद किया।
  • रवींद्रनाथ टैगोर ने किसानों के साथ मिलकर काम किया और किसानों का समर्थन भी किया। 
  • वो भी महात्मा गांधी जी की तरह ही हिंसा का विरोध करते थे, उनका यह मानना था कि मानवता सबसे बड़ी चीज है जो युद्धों को भी समाप्त कर सकती है।

राजनीतिक दृष्टिकोण

  • रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने हमेशा ही राष्ट्रवाद का समर्थन किया था। ये उनकी देशमक्ति ही थी कि उन्होंने नाइटहुड की उपाधि को त्याग दिया।
  • रबीन्द्रनाथ टैगोर जी कभी भी असहयोग आन्दोलन का समर्थन नही किया उनका मानना था हम पूरी तरह किसी का बहिष्कार नही कर सकते। हम उनसे कुछ सीख सकते है जैसे शिक्षा, विज्ञान। यही पर गांधी जी के विचार और रबींद्रनाथ टैगोर जी के विचार आपस मे टकरा जाते थे।

यात्राएं

रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने 1878 से 1932 के बीच करीबन 30 देशो की यात्रा की। वहाँ पर उन्होंने अपने साहित्य के कार्य को दूसरे लोगो तक पहुँचाया जो बंगाली भाषा नही समझते।

अंतिम समय

रबींद्रनाथ टैगोर जी को कई बीमारियों ने घेर लिया था इसीलिए उनके जीवन के अंतिम चार साल पीड़ा में बीते।

7 अगस्त 1941 को 80 साल की उम्र में रबींद्रनाथ टैगोर जी का निधन हो गया।

उल्लेखनीय कार्य

  • गीतांजलि – गीतांजलि कविताओं का एक संग्रह है, जिसमें कुल 103 कविताएँ हैं, इस काम के लिए रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को सन 1913 में नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया था।
  • 2- जन गण मन – जन गण मन भारत का राष्ट्रगान है जो रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था, जिसे 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगान के रूप में चुना गया था।
  • 3- अमर सोनार बांग्ला – अमर सोनार बंगला सन 1905 में रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने बंगाल के विभाजन के समय लिखा था। जिसे बाद में बांग्लादेश ने अपने राष्ट्रगान के रूप में चुना। अमर सोनार बांग्ला का अर्थ है “मेरा स्वर्णिम बंगाल”।

रबीन्द्रनाथ टैगोर से जुड़े हुए कुछ रोचक तथ्य  ( Interesting facts about Rabindranath Tagore in Hindi )

  • 1- सन 1930 में रबीन्द्रनाथ टैगोर बीसवीं सदी के मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से मिले।
  • 2- रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ने अपने पूरे जीवन में लगभग 2230 गीतों की रचना की।
  • 3- रबीन्द्रनाथ टैगोर दुनिया के एक मात्र व्यक्ति थे, जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनी।
  • 4- रबीन्द्रनाथ टैगोर पहले गैर-यूरोपीय थे जिनको साहित्य में नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया।
  • 5- जलियांवाला हत्याकांड का विरोध करते हुए रबीन्द्रनाथ टैगोर जी नाइटहुड की उपाधि त्याग दी थी।

हम उम्मीद करते है कि आपको रबींद्रनाथ टैगोर की जीवनी ( Rabindranath Tagore Biography in Hindi ) पसंद आई होगी।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार ( Rabindranath Tagore best quotes in Hindi )
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