मॉब लिंचिंग {Mob Lynching} क्या होता है? | मॉब लिंचिंग का मतलब क्या है?

हम अक्सर समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के माध्यम से मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बारे सुनते है. हम में से बहुत से लोग मॉब लिंचिंग के बारे में नहीं जानते हैं, इसीलिए आज के इस लेख में हम जानेंगे कि मॉब लिंचिंग क्या होता है और इसका क्या अर्थ है और इसके कारण क्या हैं।

मॉब लिंचिंग {Mob Lynching} क्या होता है? | मॉब लिंचिंग का मतलब क्या होता है?

मॉब लिंचिंग एक अवैध गतिविधि है जो भीड़ द्वारा की जाती है. भीड़ किसी व्यक्ति को यह मानकर मार देती है कि वह एक अपराधी है और लोगों द्वारा उसे बिना किसी कानूनी मुकदमे के दोषी ठहरा दिया जाता है।

सरल शब्दों में भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति की मार- मार कर हत्या करने की घटना को मॉब लिंचिंग कहा जाता है।

मॉब लिंचिंग एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल लोगों के एक बड़े समूह द्वारा लक्षित हिंसा के कृत्यों का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

मॉब लिंचिंग के कारण {Causes for Mob Lynching}

मॉब लिंचिंग की घटनाओं में वृद्धि का एक मुख्य कारण यह है कि भीड़ में किसी एक व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, हत्या के लिए हम किसे दोषी ठहराएंगे, इसलिए ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।

न्याय में देरी ही प्राथमिक कारण है कि लोग कानून को अपने हाथ में लेते हैं और परिणामों से डरते नहीं हैं।

पुलिस लोगों के जीवन की रक्षा करने और लोगों के बीच सद्भाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है लेकिन उनकी अप्रभावी जांच प्रक्रिया के कारण यह घृणा अपराध दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है।

कई जगहों पर मॉब लिंचिंग की वजह अफवाह होती है, लोग अफवाह पर विश्वास करके किसी मासूम को दोषी मानकर उसकी जान ले लेते हैं।

आज समाज जाति, वर्ग और धर्म के आधार पर बंटा हुआ है. कई जगहों पर मतभेद के कारण एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय के व्यक्ति की हत्या कर देते हैं।

मॉब-लिंचिंग के प्रकार

कारणों के आधार पर मॉब-लिंचिंग को पांच प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है. वो हैं:

  • सांप्रदायिक आधारित
  • जादू टोने
  • सम्मान रक्षा हेतु हत्या
  • बच्चा चोरी का शक
  • चोरी के मामले

मॉब लिंचिंग की घटनाएं समानता के अधिकार और भेदभाव के निषेध का उल्लंघन करती हैं, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में निहित हैं।

मॉब लिंचिंग मानव गरिमा का उल्लंघन है, संविधान के अनुच्छेद 21, और मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का घोर उल्लंघन है।

मॉब लिंचिंग को कैसे रोका जा सकता है?

नामित फास्ट ट्रैक कोर्ट

राज्यों के हर जिले में विशेष रूप से मॉब लिंचिंग से जुड़े मामलों से निपटने के लिए नामित फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करना आवश्यक है, ताकि पीड़ितों को जल्दी से न्याय मिल सके और लोग कानून को अपने हाथ मे न लें। 

पीड़ित मुआवजा योजनाएं

राज्य सरकार को पीड़ितों के राहत और पुनर्वास के लिए पीड़ित मुआवजा योजना शुरू करनी चाहिए।

राज्य में मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त कानून बनने चाहिए. उदाहरण के लिए – 2021 में, झारखंड विधानसभा ने प्रीवेंशन ऑफ मॉब वायलेंस एंड मॉब लिंचिंग बिल, 2021 पारित किया था।

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