कुंती पुत्र कर्ण का जन्म कैसे हुआ?

कर्ण के जन्म की कहानी या कर्ण के जन्म की कथा।

यह कहानी सुरु होती है कुंती के जन्म से। कुंती के पिता सूर्यसेन थे लेकिन उन्होंने अपने मित्र कुन्तिभोज को वचन दिया था। कि वो अपनी पहली संतान कुन्तिभोज को दे देंगे। इसीलिए कुंती का पालनपोषण कुन्तिभोज ने किया। एक दिन दुर्वासा ऋषि भ्रमण करते हुए राजा कुन्तिभोज के द्वार पधारे उनका बहुत अच्छा स्वागत हुआ और कुंती ने दुर्वासा ऋषि की बहुत सेवा की इससे दुर्वासा ऋषि बहुत प्रसन्न हुए और कुंती को एक मंत्र दिया कहा कि वो जिस भी देवता का वहन करेंगे वो कुंती के पुत्र के रूप में जन्म लेगा। दुर्वासा ऋषि के जाने के बाद एक दिन कुंती ने उस मंत्र को परीक्षण करने को सोचा उन्होंने सूर्य देव का ध्यान कर उस मंत्र को पढ़ा। वहाँ स्वमं सूर्य नारायण प्रकट होगये।

यह देख कर कुन्ती डर गई उन्होंने सूर्य देव से कहा हे सूर्य नारायण मैं अभी कुमारी कन्या हु। कृपया आप वापस चले जाएं मैंने तो बस ये मंत्र का परीक्षण करने के लिए ही इसका जाप किया था। भगवान सूर्य बोले कुंती मंत्र की शक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती मेरे विलीन होते ही तुम्हे एक पुत्र की प्राप्ति होगी जो अजय होगा। फिर यही कुंती पुत्र भविष्य में कर्ण के नाम से जाना गया।

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

कर्ण का पालन पोषण किसने किया?

कर्ण को कुंती ने लजा वश गंगा नदी की प्रवाह में बहा दिया था, कर्ण नदी में बहते हुए अधिरथ को प्राप्त हुए थे इसीलिए कर्ण का पालन पोषण अधिरथ और राधा ने किया था।

कर्ण ने किससे ब्रम्हास्त्र चलाना सीखा था?

कर्ण ने भगवान परशुराम से सारे दिव्य अस्त्रों का ज्ञान प्राप्ति किया था उसमें से एक ब्रम्हास्त्र भी था। 

कर्ण के धनुष का नाम क्या था।

विजयधनुष 

कर्ण की पत्नी का क्या नाम था?

कर्ण की दो पत्नियां थी वृषाली और सुप्रिया।

कर्ण के गुरु कौन थे?

भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार और भगवान शिव के शिष्य।

कर्ण के पिता कौन थे?

कर्णकेपिता सुर्य देव थे लेकिन उनका पालन पोषण अधिरथ ने किया था।

Leave a Comment

error: Content is protected !!