GDP kya hai – जीडीपी क्या है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी।

What is GDP in Hindi?

आज हम बात करने वाले है GDP kya hai,  जीडीपी के प्रकार और जीडीपी के बारे में संपूर्ण जानकारी।

जीडीपी किसी भी देश के आर्थिक विकास को मापने के लिए प्रमुख तरीको में से एक है। जीडीपी का उपयोग पूरी दुनिया मे होता है इसीलिए ये जानना हमारे लिए जानना जरूरी हो जाता है कि जीडीपी क्या है।

GDP kya hai
GDP kya hai

जीडीपी – सकल घरेलू उत्पाद

जीडीपी की परिभाषा ( GDP kya hai )

परिभाषा – सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) एक समय अवधि के दौरान एक देश की सीमा के अंदर निर्मित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं की मौद्रिक मूल्य है।

प्रमुख बिंदु

* GDP (सकल घरेलू उत्पाद) देश का एक आर्थिक स्नैपशॉट प्रदान करता है जिसका उपयोग देश की अर्थव्यवस्था और विकास दर के आकार का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।

* जीडीपी की गणना वार्षिक आधार पर की जाती है और तिमाही आधार पर भी।

* निर्णय लेने के लिए जीडीपी निवेशकों, नीति निर्धारकों और व्यवसायियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। 

जीडीपी का इतिहास

  • सन 1934 में जीडीपी को सबसे पहले अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में पेश किया गया सिमोन कुनजेट के द्वारा। हालांकि इसका इस्तेमाल व्यापक रूप से सुरु नही हुआ लेकिन यह पहली बार था।
  • इसके बाद सन 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के बाद से इसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने लगा। ये बहुत जरूरी भी था। क्योंकि हमें एक देश की आर्थिक वृद्धि को नापने का मानक मिल गया।
  • हालांकि की इसमे भी कुछ कमियां है लेकिन इसे आज पूरी दुनिया इस्तेमाल करती है।

जीडीपी फुल फॉर्म ( GDP Full Form in Hindi )

जीडीपी ( जीडीपी ) – सकल घरेलू उत्पाद

जीडीपी फॉर्मूला ( GDP Formula in Hindi )

जीडीपी ( GDP ) = खपत + निवेश + सरकार का खर्च + शुद्ध निर्यात 

जीडीपी के प्रकार ( Types of GDP in Hindi )

GDP ke prakar
GDP ke Prakar

1- वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद ( Real GDP )

2- नॉमिनल जीडीपी ( Nominal GDP )

3- वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद ( Real GDP ) – हम सब जानते है कि वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार बदलाव आता रहता है इसीलिए वास्तविक जीडीपी की गणना करना मुश्किल हो जाता है। इस मुश्किल को दूर करने के लिए हम एक आधार वर्ष ( base year ) निर्धारित करते है। ताकि हम आधार वर्ष ( base year ) की कीमतों को लेकर वास्तविक जीडीपी की गणना कर सकें। इससे हम महगाई को हटा देते है। इंडिया में यह आधार वर्ष  2011-12 हैै।

जीडीपी की गणना करने के लिए उस देेश के अंदर उत्पादित सभी सेवाओं और वस्तुओं केे मौद्रिक मूल्य की गणना की जाती है। 

वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की गणना ( Calculation of Real GDP )

मान लीजिए

2020 में एक देश के अंदर 10 किताबे बनी।

उस देश का आधार वर्ष = 2011-12

2020 में ₹10 रुपये की एक किताब

आधार वर्ष की कीमत ( 2011-12 ) = ₹5 रुपए की एक किताब।

जीडीपी = ₹50 ( क्योंकि किताबो को हम आधार वर्ष की कीमतों से गुणा कर देंगे। )

2- नॉमिनल जीडीपी ( Nominal GDP ) – नॉमिनल जीडीपी में मंगाई भी जुड़ी होती है क्योंकि नॉमिनल जीडीपी की गणना उसी साल की कीमतों पर होती है।

जीडीपी की गणना ( GDP calculation in Hindi )

मान लीजिए एक देश मे 2020 में 10 किताबे बनी और एक किताब की कीमत 10 रुपये है। तो उस देश की जीडीपी 100 रुपये होगी। 10 किताबो को 10 से गुना कर दीजिए। 

वास्तविक जीडीपी और नॉमिनल जीडीपी के बीच अंतर ( Real GDP Vs Nominal GDP )

देखिए जब हमने नॉमिनल जीडीपी की गणना की तो उसमें महगाई भी जुड़ गई थी इसीलिए वो 100 रुपये थी। इसीलिए हम नही कह सकते कि देश मे ज्यादा उत्पादन हुआ तभी जीडीपी ज्यादा है अगर वस्तुओं और सेवाओं की किमाते यदि बढ़ती है तब भी जीडीपी वृद्धि हमे ज्यादा लगती हैं। इसीलिए हम वास्तविक जीडीपी निकालते है। हमने वास्तविक जीडीपी निकली थी ₹50 रुपये। इसीलिए वास्तविक जीडीपी को ज्यादा महत्व दिया जाता है। 

जीडीपी की कमी ( Drawbacks of GDP )

  • जीडीपी केवल आर्थिक स्वास्थ्य को बताता है यह बुनियादी ढांचे, प्रति व्यक्ति आय, स्वास्थ्य और मैट्रिक्स को नहीं बताता है।
  • जीडीपी समग्र कल्याण पर विचार किए बिना भौतिक उत्पादन पर जोर देती है – अकेले जीडीपी वृद्धि किसी राष्ट्र, विकास या उसके नागरिक कल्याण को माप नहीं सकती है। उदाहरण के लिए भारत में जीडीपी में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन इससे पर्यावरणीय प्रभाव और आय असमानता में वृद्धि के कारण समाजों के लिए एक महत्वपूर्ण लागत है।

जीडीपी और पीपीपी ( GDP vs PPP )

जीडीपी की गणना के लिए कई अर्थशास्त्री जीडीपी में बहुत अधिक समायोजन कर रहे हैं।

जीडीपी हमें अर्थव्यवस्था के आकार को दिखाता है, लेकिन यह बुनियादी ढांचे, रहने की स्थिति, स्वास्थ्य और अन्य मापदंडों को नहीं बताता है।

हम यह भी देखते हैं कि रहने की लागत सभी देशों में समान नहीं है हम चीन की जीडीपी की तुलना न्यूजीलैंड के नॉमिनल जीडीपी से नहीं कर सकते हैं, उदाहरण के लिए, चीन की आबादी न्यूजीलैंड से लगभग 200 से 300 गुना है।

इस समस्या को हल करने के लिए, अर्थशास्त्री ने प्रति व्यक्ति जीडीपी की तुलना की। प्रति व्यक्ति जीडीपी का मतलब है जब हम कुल जीडीपी को उसकी जनसंख्या से विभाजित करते हैं तो हम प्रति व्यक्ति जीडीपी प्राप्त करते हैं। यह आंकड़ा जीवन जीने के स्तर को बताता है।

यहां तक ​​कि यह उपाय अभी भी अपूर्ण है। मान लीजिए कि चीन में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद $ 8000 है, जबकि न्यूजीलैंड में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद $ 30000 से $ 40000 है। यह जरूरी नहीं है कि न्यूजीलैंड के व्यक्ति की औसत कमाई चीनी व्यक्ति के औसत से 5 गुना बेहतर है। प्रति व्यक्ति जीडीपी कोई देश रहने के लिए कितना महंगा है, इसका हिसाब नहीं है।

क्रय शक्ति समता ( PPP Purchasing Power Parity ) – हर देश मे रहने रहने की कीमत अलग होती है। यदि आप न्यूज़ीलैंड जैसे विकसित देश में रहते है तो आपकी इनकम तो ज्यादा होगी लेकिन वहाँ पर आपको किसी चीज़ के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी लेकिन चीन में एसा नही वहाँ जीने का स्तर ( Cost of living ) कम है इसीलिए आपको हर चीज़ सस्ते में मिल जाएगी। 

मान लीजिए 1 किलो सेब की कीमत न्यूज़ीलैंड में $10 है लेकिन चीन में 2 चीनी युआन इसी बीच के अंतर को लेकर हम क्रय शक्ति समता ( PPP Purchacing Power Parity ) को निकालते है। क्रय शक्ति समता में हम उस देश मे रहने की लागत देखते है।

जीडीपी डेटा के लिए स्रोत ( जीडीपी डेटा कौन जारी करता है। )

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) सबसे विश्वसनीय आंकड़ों में से एक है जो नाममात्र और पीपीपी के मामले में देशों की जीडीपी प्रदान करता है, यह विश्व आर्थिक दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।

 सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों का एक और विश्वसनीय स्रोत आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) है। ओईसीडी न केवल ऐतिहासिक डेटा प्रदान करता है बल्कि जीडीपी वृद्धि के लिए पूर्वानुमान भी प्रदान करता है।

तीसरा है विश्व बैंक जीडीपी और आर्थिक दृष्टिकोण और रिपोर्ट का सबसे विश्वसनीय डेटा है।

भारत में आरबीआई जीडीपी और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जीडीपी डेटा प्रदान करता है।

क्या जीडीपी ग्रोथ का निवेश पर असर होता है।

 किसी भी देश में निवेश करने से पहले निवेशक हमेशा जीडीपी देखते हैं, निर्णय लेने के लिए जीडीपी एक प्रमुख उपकरण है।

विभिन्न देशों की जीडीपी वृद्धि दर की तुलना परिसंपत्ति आवंटन में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश के बारे में निर्णय लेने में की जा सकती है।

दो दिलचस्प मेट्रिक्स जो निवेशक इक्विटी बाजारों के मूल्यांकन की कुछ समझ प्राप्त करने के लिए उपयोग कर सकते हैं, कुल बाजार पूंजीकरण का अनुपात जीडीपी में प्रतिशत के रूप में है। दूसरा प्रतिशत के रूप में सकल घरेलू उत्पाद अनुपात में कुल कंपनियों की लाभप्रदता है।

निष्कर्ष

जीडीपी किसी के देश की अर्थव्यस्था के साइज और आर्थिक ग्रोथ को मापने का तरीका है। अंतिम सभी वस्तुओं और सेवाओं की मौद्रिक कीमत को जीडीपी कहते है।

हम उमीद करते है कि आपको GDP kya hai ( जीडीपी क्या है ) समझ मे आ गया होगा।

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