Ritesh Agarwal Biography in Hindi | रितेश अग्रवाल का जीवन परिचय।

रितेश अग्रवाल कौन है?

रितेश अग्रवाल एक भारतीय मीडिया मैग्नेट और इंटरनेट एंटरप्रेन्योर हैं। वह ओयो के सीईओ और संस्थापक हैं। उन्हें दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र के सेल्फ मेड अरबपति के रूप में भी जाना जाता है। रितेश को बिजनेस वर्ल्ड यंग एंटरप्रेन्योर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।  रितेश अग्रवाल ने ओयो को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी हॉस्पिटैलिटी चेन बना दिया। इसलिए आज हम रितेश अग्रवाल की जीवनी, रितेश अग्रवाल की कहानी, उनके संघर्ष और ओयो के सफलता की कहानी के बारे में जानेंगें।

रितेश अग्रवाल का जीवन परिचय

पूरा नामरितेश अग्रवाल
जन्म16 नवंबर 1993
जन्म स्थानबिसाम कट्टक, ओडिशा
उम्र/आयु28 साल 
कुल संपत्ति
(Net Worth)
₹7253 करोड़
(जुलाई 2021 तक)
टाइटलफाउंडर एंड सीईओ ऑफ
ओयो रूम्स
व्यवसायएंटरप्रेन्योर
पुरुस्कारथिएल फेलोशिप

Biography of Ritesh Agarwal in Hindi | रितेश अग्रवाल की जीवनी।

Ritesh Agarwal Biography in Hindi
Ritesh Agarwal Biography in Hindi

रितेश अग्रवाल का प्रारंभिक जीवन

रितेश अग्रवाल का जन्म 16 नवंबर 1993 को बिसाम कट्टक, ओडिशा में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। रितेश अग्रवाल का परिवार व्यवसायिक पृष्ठभूमि से था। लेकिन उनकी वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं थी। 


रितेश अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उन्हें बचपन से ही कंप्यूटर का शौक था। हम जानते हैं कि सभी बड़े इंटरनेट एंटरप्रेन्योर में एक बात समान है, उन सभी को कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी से बहुत लगाओ था जैसे की मार्क जुकरबर्ग, बिल गेट्स आदि।

रितेश को Entrepreneur बनने की प्रेरणा कहां से मिली?


रितेश की बड़ी बहन, जो इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही थी, उनके कॉलेज में एक एंटरप्रेन्योर फेस्ट हुई थी। जब उनकी बहन ने यह बात अपने घर पर बताई तो उस समय रितेश चौथी कक्षा में था। जब उन्होंने पहली बार एंटरप्रेन्योर शब्द सुना, रितेश को एंटरप्रेन्योर शब्द पसंद आया लेकिन उन्हें एंटरप्रेन्योर का मतलब नहीं पता था। रितेश ने उसी दिन से तय कर लिया कि वह एक एंटरप्रेन्योर बनेंगे।

रितेश के छोटे कारोबार।

अपने खर्चों को पूरा करने के लिए, उन्होंने तेजी से बढ़ते उपभोक्ता वस्तुओं के साथ सिम कार्ड भी बेचे।

इंटर पास करने के बाद रितेश IIT की तैयारी के लिए कोटा आ गए, वहाँ बच्चे अधिक समय तक पढ़ाई करते थे। लेकिन रितेश को यह सब पसंद नहीं था। उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। एंटरप्रेन्योर एन्वेंट देखने के लिए रितेश हर वीकेंड पर दिल्ली आते थे। कम उम्र के कारण, उन्हें कई आयोजनों में मुफ्त प्रवेश मिल जाता था।

रितेश ने इन इवेंट्स से बहुत कुछ सीखा जैसे कि एक एंटरप्रेन्योर की बॉडी लैंग्वेज, उसके बोलने का तरीका, उनकी रणनीति और उनके विचार।
जब रितेश इवेंट्स अटेंड करने दिल्ली आते थे, तो उन्हें कई बार होटलों में रुकना पड़ता था। उन्होंने पाया कि होटल अच्छी गुणवत्ता के नहीं थे, और सस्ते कमरे खोजने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता था।


रितेश ने कई बातें नोटिस कीं, दिल्ली के आसपास के गाँव के कई कमरे खाली रहते थे। लोगों से बात करने के बाद, उन्हें पता चला कि लोग इन कमरों को किराए पर देना चाहते थे, लेकिन उन्हें किरायेदारों को खोजने में कठिनाई होती थी।


कई पर्यटक दिल्ली आते है। उन्हें कमरे खोजने में कठिनाई होती थी। यह निश्चित था, वहाँ सस्ते और अच्छे कमरों की माँग अधिक थी।
इस समस्या को देखते हुए, रितेश के दिमाग में एक विचार आया कि क्यों न अपने कोडिंग कौशल का उपयोग करके एक मंच बनाया जाए जहां लोग किराए पर अपने कमरे दे सकें।


इसके बाद 17 साल की उम्र में सन 2012 में उन्होंने अपने पहले स्टार्टअप की स्थापना की, ओरावेल स्टेज़ ( Oravel Stays ), भारत का पहला स्टार्टअप जिसमें सर्विसड अपार्टमेंट्स, बेड और ब्रेकफास्ट सभी उनकी वेबसाइट पर सूचीबद्ध था। यहाँ से उनकी Entrepreneur की जर्नी सुरु हुई।


रितेश कोटा आईआईटी जेईई की तैयारी के लिए आए थे, उस पर ध्यान न दे पाने के कारण उन्होंने आईआईटी की तैयारी छोड़ दी और दिल्ली के एक कॉलेज में एडमिशन ले लिया।

उसके बाद, रितेश होटल उद्योग के बारे में जानने की कोशिश करते हुए हर जगह घूमने लगे। दो-तीन दिन कॉलेज जाने के बाद, उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया।


कुछ समय बाद रितेश के पापा दिल्ली आये रितेश से मिलने के लिए, वहाँ पहुँचकर उनको पता चला कि उनका बेटा छह मिहिनो से कॉलेज ही नही गया था। फिर रितेश ने किसी तरह से अपने पिता और घरवालों को मनाया।

कुछ समय के बाद, रितेश ने ओरावेल स्टेज़ का नाम बदलकर ओयो रूम्स रख दिया क्योंकि कुछ लोगों को ओरेवेल स्टेज़ के साथ कोई अच्छा अनुभव नहीं रहा था। और Oravel Stays के साथ कई दिक्कतें भी थी इसलिए उन्होंने कंपनी का नाम ही बदल दिया।

ओयो रूम्स ( OYO Rooms ) के सफलता की कहानी।

रितेश ने फिर कुछ शर्तों के साथ गुड़गांव होटल के मालिक के साथ साझेदारी की और रितेश ने होटल के मालिक से कहा, अगर कोई नुकसान होता है, तो मैं इसका अकेले भुगतान करूंगा। यदि लाभ हुआ, तो हम आपस में आधा वितरित करेंगे। यह सुनकर होटल का मालिक तुरंत मान गया। उसका होटल वैसे भी घाटे में चल रहा था।


होटल मिलने के बाद रितेश ने होटल की सफाई शुरू कर दी। उस होटल की हालत बहुत खराब थी, रितेश ने सारे बेकार फर्नीचर हटा दिए। और उस होटल को पूरी तरह से अपने हिसाब से डिजाइन किया। कुछ मार्केटिंग करने के बाद, उनके होटल में लोग आने लगे।
कुछ समय बाद रितेश को कई होटल मालिकों से फोन आने लगे। यह होटल मालिकों के लिए बहुत अच्छी डील थी। क्योंकि होटल मालिकों को अपना होटल OYO को देना था। उन्हें पूरे महीने का किराया मिल जाता था। 


रितेश के लिए जादुई वर्ष।

रितेश ने द सोशल नेटवर्क नामक एक फिल्म देखी थी जिसमें उन्होंने थिएल फैलोशिप के बारे में सुना था। यही कारण है कि उन्होंने थिएल फेलोशिप के लिए भी आवेदन किया और वह पहले एशियाई थिएल फैलोशिप प्राप्तकर्ता बन गए, उन्हें $100000 की फेलोशिप मिली। इस समय तक OYO के पास तीन होटल्स थे।


अब रितेश को एक अच्छी टीम की जरूरत थी, तो रितेश के दोस्त ने उसे अभिनव सिन्हा से मिलने के लिए कहा जो हॉवर्ड बुसिनेस स्कूल के छात्र थे। पहले तो रितेश ने मना कर दिया, अभिनव सिन्हा OYO के होटल में ठहरे हुए थे।


जब रितेश अभिनव के कमरे में गए, तो अभिनव ने कहा, ‘आलू का पराठा बहुत अच्छा है, यह सुनकर रितेश को बहुत खुसी हुई। रितेश ने अभिनव को ओयो में शामिल होने के लिए कहा, अभिनव भी सहमत हो गए और उसके बाद उन्होंने अपने काम को आपस में बांट लिया।
अब रितेश के पास टीम के साथ-साथ फंडिंग भी थी, अब उन्होंने तेजी से विस्तार करना शुरू कर दिया। उन्होंने OYO में 50 होटल जोड़े। 2014 के अंत तक, Oyo गुंडगाँव में नंबर 1 होटल चेन बन गया।


रितेश ने ओयो को इंडिया का नंबर 1 होटल चेन बनाने का लक्ष्य रखा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, उन्होंने अपने कर्मचारियों को इकट्ठा किया और पूछा कि हम एक महीने में कितने होटलों को ओयो के साथ जोड़ पाएंगे।


किसी ने 50 कहा, किसी ने 35 कहा, लेकिन रितेश ने कहा कि हम महीने में 100 होटल ओयो के साथ जोड़ेंगे। जब वह महीना खत्म हुआ, तो उन्होंने लगभग 130 होटल जोड़े थे। 


सन 2016 में OYO ने Qlik pass नामक कंपनी को खरीद लिया। Qlik डेटा साइंस के क्षेत्र में कार्यरथ थी।

Oyo में निवेश की जानकारी

ओयो ने 2018 में $1 बिलियन डॉलर और 2019 में स्टार पुण्य निवेश लिमिटेड से $ 100 मिलियन जुटाए। मार्च 2018 में, ओयो ने नोवाकोटिया बुटीक होम का अधिग्रहण किया, जो बड़ी कंपनियों को अपार्टमेंट प्रदान करती है। सन 2018 में ओयो ने weddingz.in को भी खरीद लिया।

फरवरी 2019 में, Oyo ने चीनी कंपनी DIDI CHUXING से $100 मिलियन की फंडिंग जुटाई। और अक्टूबर 2019 में ओयो ने सॉफ्टबैंक ग्रुप, लाइट्सपीड वेंचर कैपिटल और सिकोइया इंडिया से $1.5 बिलियन का फंड जुटाया।


2019 में, Oyo ने यूरोप की सबसे बड़ी अवकाश रेंटल कंपनी लीजर ग्रुप को खरीद लिया। 2019 में Oyo ने Airbnb के साथ भागीदारी की और innov8 खरीदा।

अगस्त 2019 में, Oyo ने अपना पहला निवेश अमेरिका में किया, हूटरर्स कैसीनो होटल में निवेश किया।

OYO की वर्तमान स्थिति

OYO Rooms
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OYO दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी हॉस्पिटैलिटी चेन है।
मूल्यांकन – $10 बिलियन डॉलर
मुख्यालय – गुड़गांव, हरियाणा, भारत
व्यापार नाम – OYO रूम्स, OYO होटल और OYO होम्स।
कर्मचारी – आज ओयो दुनिया में 17000 लोगों को रोजगार देता है।
उत्पाद – OYO टाउनशिप, OYO होम्स, OYO छुट्टी होम्स और अधिक।
सीईओ और संस्थापक – रितेश अग्रवाल
OYO की उपस्थिति – भारत, यूएई, नेपाल, जापान,
सऊदी अरब, इंडोनेशिया, चीन, फिलिपिन,
वियतनाम, ब्राजील, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका और अधिक।
OYO Website – https://www.oyorooms.com/
OYO Rooms

हम उम्मीद करते है अपने Ritesh Agarwal Biography in Hindi से बहुत कुछ सीखा होगा, किस प्रकार एक कॉलेज ड्रॉपआउट ने इतनी बड़ी कंपनी खड़ी कर दी इतनी कम उम्र में।

Ritesh Agarwal Quotes in Hindi

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आपका ब्रांड आपकी संस्कृति, उद्देश्य और पहचान को दर्शाता है। इसके बारे में सोचना शुरू करना कभी भी जल्दी नहीं है।

Ritesh Agarwal
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“कुछ ऐसा बनाना ज्यादा बेहतर है जिसे 100 लोग प्यार करें, बजाय एसे चीज के जिसे केवल 1000 लोग पसंद करें।”

Ritesh Agarwal

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